Haryana

हेलीकॉप्टर क्रैश मामला: हिसार के डोभी गांव का रहने वाला था शहीद अनुज राजपूत, सेक्टर 14 में रहता है दादा व चाचा का परिवार

हिसार34 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

शहीद मेजर अनुज राजपूत

जम्मू-कश्मीर के ऊधमपुर स्थित पटनीटॉप में मंगलवार को सेना के हेलीकॉप्टर क्रैश में शहीद मेजर अनुज राजपूत का बुधवार को राजकीय सम्मान के साथ पंचकूला में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष ज्ञानचंद गुप्ता भी शहीद को श्रृद्धांजलि देने के लिए सेक्टर 20 के श्मशान घाट में पहुंचे थे। शहीद 26 वर्षीय मेजर अनुज राजपूत बीते कई सालों से अपने माता-पिता के साथ पंचकूला में रह रहे हैं लेकिन उनका पारिवारिक नाता हिसार के डोभी गांव से है। अनुज का पैतृक गांव डोभी है जहां से करीबन 25 साल पहले उनके पिता कुलबंश सिंह वकालत करने के लिए चंडीगढ़ आए थे। शहीद मेजर अनुज राजपूत के दादाजी फतेह सिंह उनके चाचा जोन व मोहन के साथ हिसार के सेक्टर 14 में रहते हैं। ग्रामीणों के अनुसार अनुज के पिता कुलबंश व हरबंश कई साल पहले ही गांव से चले गए थे। उनके दादा फतेहसिंह कभी-कभार गांववालों व अपने पारिवारिक लोगों से मिलने डोभी आ जाते हैं। गांववालों को भी इस घटना के बाद में बुधवार को पता चला कि शहीद हुआ अनुज राजपूत उनके गांव का बेटा है। नामदेव समुदाय से संबंध रखने वाले अनुज के दादा फतेहसिंह गांव में ही खेतीबाड़ी करते थे और राजनीति में भी अच्छी पकड़ थी। अनुज राजपूत अपने माता-पिता के इकलौते पुत्र थे। उनकी कुछ समय पूर्व ही दिल्ली की एक लड़की के साथ सगाई हुई थी और कुछ समय बाद शादी होने वाली थी। कई सालों से अनुज व उनका परिवार पंचकूला में रह रहा है।

अनुज राजपूत की 12वीं तक पढ़ाई चंडीगढ़ में हुई। इसके बाद एनडीए की पढ़ाई करने देहरादून चले गए थे। वर्ष 2015 में वह मेजर बन गए थे। 18 सितंबर को जन्मदिन था। 26 वर्षीय अनुज 2015 में मेजर बने थे। इस साल डेढ़ महीने पहले 23 जुलाई को उनकी सगाई हुई थी। अनुज राजपूत की मां ऊषा आर्य ने अपनी सहेली को बताया था कि फरवरी 2022 में अनुज की शादी कर दूंगी। ऊषा आर्य पंचकूला के सेक्टर- 20 स्थित गांव कुंडी के सरकारी स्कूल में अध्यापिका हैं। वह बेटे की सगाई के बाद उसकी शादी को लेकर काफी खुश थीं। वह अपने घर में बहू लाने की तैयारियों में जुटी हुईं थीं। मगर मंगलवार को ही बेटे की शहादत की खबर आ गई।

अनुज के पड़ोसी कैप्टन डीके उप्पल ने बताया कि, अनुज बहुत विनम्र, आज्ञाकारी और प्यारे युवा साथी थे। हमने उसके जैसा बच्चा कभी नहीं देखा था। पायलटों के परिवार से आने वाले मेजर राजपूत को छोटी उम्र से ही उड़ने का शौक था। वह केवल 18 वर्ष के थे जब वह एनडीए में शामिल हुए और एक कमीशन अधिकारी बने। डेढ़ महीने पहले ही उन्हें मेजर के पद पर पदोन्नत किया गया था। सेवा के दौरान उन्हें कई पुरस्कार मिले। कैप्टन उप्पल ने खुलासा किया कि मेजर राजपूत करीब एक साल पहले एक और दुर्घटना में बाल-बाल बचे थे। एक चीता हेलीकॉप्टर एक हाई-वोल्टेज तार में फंस गया था। अनुज भाग्यशाली था क्योंकि मरम्मत कार्यों के कारण उस समय बिजली बंद कर दी गई थी। अफसोस की बात है कि वह इस बार दुर्घटना से बच नहीं सके।

जम्मू-कश्मीर के पटनीटॉप इलाके के पास सेना का एक चीता हेलिकॉप्टर खराब मौसम के कारण क्रैश हो गया। जिसमें पायलट और को-पायलट की मौत हो गई। मृतक जवानों की पहचान मेजर रोहित कुमार और मेजर अनुज राजपूत के तौर पर हुई। हेलिकॉप्टर ने नगरोटा इलाके से उड़ान भरी थी। यह हादसा सुबह 10.30 से 10.45 बजे के बीच पटनीटॉप एरिया के शिवगढ़ धार में हुआ। दोनों पायलट ट्रेनिंग पर थे। चीता हेलिकॉप्टर रूटीन उड़ान पर था, जिसे आर्मी के दो मेजर उड़ा रहे थे। इसी दौरान मौसम खराब होने के कारण फोर्स लैंडिंग करनी पड़ी और हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया था।

खबरें और भी हैं…

Source link

Related Articles

Back to top button