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लोग परेशान: कंप्लीशन सर्टिफिकेट के लिए सालों ने काट रहे चक्कर, पंचकूला में अटकी फाइल

करनालएक घंटा पहलेलेखक: रमेश पाल

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एचएसवीपी कार्यालय में लगाए गए कैंप में प्रशासक को शिकायत सुनाने के लिए अपनी बारी के इंतजार में बैठे लोग।

  • एचएसवीपी के कैंप में लोगों ने प्रशासक के समक्ष रखी समस्या, कहा- नियम पूरे, पर नहीं मिल रहा कंप्लीशन सर्टिफिकेट
  • सेक्टर-12 में लगे कैंप में लोगों ने प्रशासक के सामने ही अधिकारियों पर लगाए लापरवाही के आरोप

सेक्टरों में नियमों के तहत मकान बनाने के बावजूद मालिकों को कंप्लीशन सर्टिफिकेट नहीं मिल पा रहे हैं। हालात इतने बदतर बने हैं कि आवेदन के 8 माह में 18 बार हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के कार्यालय में चक्कर काटने के बावजूद सेक्टर-13 एक्टेंशन निवासी देशराज भाटिया को सर्टिफिकेट नहीं मिला है। पंचकूला स्थित मुख्यालय में बार-बार रिमाइंडर और मेल भेजने का भी कोई असर नहीं हुआ है।

कंप्लीशन सर्टिफिकेट देने की बजाय मकान मालिक पर 5 लाख रुपए का ब्याज लगा दिया। जिला कार्यालय ने 10 दिसंबर 2020 को फाइल मुख्यालय भेजी थी, लेकिन आज तक कंप्लीशन सर्टिफिकेट जारी नहीं किया गया है। शहर के सेक्टरों में यह अकेला केस नहीं है। दर्जनों केसों की फाइलें एचएसवीपी के कार्यालय में दबी पड़ी हैं।

सोमवार को एचएसवीपी पंचकूला के प्रशासक धर्मेंद्र सिंह ने कैंप लगाकर 54 पुराने केस की सुनवाई की और संबंधित अधिकारियों को निपटारे के निर्देश दिए। प्रशासक के सामने ही लोगों ने अधिकारियों पर लापरवाही के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सर्टिफिकेट देने में अधिकारियों की लापरवाही का खामियाजा मकान मालिकों को भुगतना पड़ रहा है। मकान मालिकों को भुगतना पड़ रहा है।

आईडी चेक की तो पता चला 5 लाख रुपए ब्याज
देशराज भाटिया ने कहा, ‘1984 में टेंपरेरी सीवर कनेक्शन लिया था। अपने बिल समय से भरता हूं। पिछले साल ऑनलाइन आईडी चेक कि कनेक्शन की एवज में 5 लाख रु. का ब्याज लगा दिया। दिसंबर 10 को ओसी का केस बनाकर मुख्यालय भेज दिया। 8 माह से कार्यालय में चक्कर काट चुका हूं और दर्जनों बार रिमाइंडर व मेल भेज चुके हैं, लेकिन ओसी नहीं मिल पाई है।’

1985 से अब तक नहीं मिल पाया कंप्लीशन सर्टिफिकेट
सेक्टर-13 के रमेश लाल मदान व उनके साथी बीएस सरदाना ने कहा कि 1985 में कंप्लीशन सर्टिफिकेट के लिए अप्लाई किया था। जुर्माना भी भर दिया था। हेड ऑफिस फरीदाबाद में केस गया था। वहां से लेटर आया था कि उनको सीसी जारी कर दी है। लेकिन आज तक नहीं मिली है। उन्होंने 2003 में फिर लेटर भेजा, लेकिन जवाब नहीं आया। एचएसवीपी की तरफ उनका 6750 रुपए सरपल्स है। सर्टिफिकेट नहीं होन से मकान नहीं बेच पा रहे।

कैंप में 54 केस आए, जल्द निपटान के दिए निर्देश
एचएसवीपी के प्रशासक धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि कैंप में 54 पुराने कंप्लीशन केस पर सुनवाई की है। इनमें से 28 का ऑनलाइन अप्लाई कराया जाएगा। 13 केस में ओसी जारी हो चुकी है। 3 केस अपडेशन के लिए मुख्यालय गए हुए हैं। 10 केस ऐसे हैं एक्सटेंशन फीस या इनहांसमेंट के चलते पेंडिंग है। मीटिंग में उनके साथ एक्सईएन धर्मवीर सिंह, सुपरिंटेंडेंट डॉ. सुशील कुमार, पंचकूला से सुपरिंटेंडेंट पालाराम, एसडीओ केवल कृष्ण आदि उपस्थित रहे।

डेढ़ साल पहले अप्लाई किया, नहीं हुई सुनवाई
सेक्टर-13 के सुमित चौधरी ने कहा, ‘डेढ़ साल पहले कंप्लीशन के लिए अप्लाई किया था, आज तक सुनवाई नहीं हुई। कार्यालय जाते हैं तो कहते हैं पंचकूला फाइल भेज दी है। वहां से आेके होकर आनी है। अधिकारी मनमर्जी कर रहे हैं।’

पहले कहते कि ओसी जरूरी नहीं, अब मांग रहे
सेक्टर-13 के वीपी मानिक कहते हैं, ‘1983 में मकान का पीओसी मिल गया था, ओसी नहीं मिला। तब कार्यालय में कहा था कि पीओसी के बाद ओसी की जरूरत नहीं है। अब कह रहे कि मकान बेचना है या खरीदना है ओसी का होना जरूरी है।’

सीएम विंडो पर शिकायत की, नहीं हुआ समाधान
सेक्टर-13 के राधेश्याम गुप्ता ने बताया कि सीएम विंडों पर शिकायत के बाद भी कंप्लीशन नहीं मिला। शिकायत के रिप्लाई में कोई ड्यूज नहीं कहा जाता है। इसके लिए मैं पंचकूला भी जा चुका हूं, लेकिन वहां भी लेटर नहीं मिला है।’

1991 में अप्लाई किया था, पर अब ड्यूज दिखा रहे
सेक्टर-13 एक्सटेंशन के एमएल मेहता ने कहा, ‘मकान 1983 में बना था। मकान की कन्वीश डीड भी हो गई। 1991 में कंप्लीशन के लिए अप्लाई किया था। तब कुछ नहीं बताया, लेकिन अब 8 लाख रुपए ड्यूज दिखाए जा रहे हैं। मकान का लोन भी क्लियर कर दिया गया। लेकिन एचएसवीपी के रिकाॅर्ड में लोन खड़ा है। मकान को बेच नहीं पा रहा हूं।’ ​​​​​​​

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