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खेती-किसानी पर संकट के बादल: रिकार्डतोड़ बेमौसमी बारिश से जिले की 2 लाख 81 हजार हेक्टेयर फसलों पर मंडराया खतरा, कपास, मूंग, ग्वार, धान व तिलहनी फसलों में सबसे ज्यादा नुकसान

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हिसारएक घंटा पहले

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जमीन पर बिछी बाजरे की फसल

मानसून सीजन में इस बार सितंबर महीने में लगातार हो रही रिकार्डतोड़ बारिश ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी है। लगातार हो रही बारिश के कारण जिले की करीबन 2 लाख 81 हजार हेक्टेयर फसलों पर खतना मंडराने लगा है। जो फसलें बारिश के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं उनमें कपास, मूंग, ग्वार, बाजरा, धान व मूंगफली की फसल है। मंगलवार देर रात से लेकर बुधवार को जिले में 142 एम एम तक बारिश हो चुकी है। सितंबर माह में एक दिन में हुई बारिश ने 32 साल का रिकार्ड तोड़ दिया है। इससे पहले 1988 में एक दिन में ही 158 एम एम बारिश हुई थी। अब तक अकेले सितंबर महीने में जिले में 156 एम एम बारिश हो चुकी है जो सामान्य बारिश 48 एम एम से 224 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं पूरे मानसून सीजन में इस साल अब तक 456 एम एम बारिश हुई है जो सामान्य बारिश 300 एम एम से 52 प्रतिशत ज्यादा है। इसके अलावा प्रदेश में अब तक 523 एम एम बारिश हुई है जो सामान्य 428 एम एम से 22 प्रतिशत ज्यादा है। प्रदेश में सितंबर महीने में औसतन से 102 गुणा बारिश हो चुकी है।

जिले में ये है फसलों का डाटा

धान 58807 हेक्टेयर

कपास 150365

ग्वार 25210

बाजरा 27100

मूंग 24570

मूंगफली 2478

गन्ना 1962

ज्वार 20052 हेक्टेयर

पककर तैयार हो चुकी फसलों में ज्यादा नुकसान, सबसे ज्यादा प्रभावित हुई कपास

खरीफ सीजन की फसलें ग्वार, बाजरा, मूंग आदि लगभग एरिया में पककर तैयार हो चुका है। अमूमन अक्तूबर के पहले सप्ताह में इन फसलों की कटाई शुरू हो जाती है। इस बार हो रही बारिश के कारण इन फसलों को लगातार नुकसान हो रहा है। बारिश के कारण ग्वार व मूंग की फलियां फूलकर खुद ही फटना शुरू हो जाती है जिस कारण दाना जमीन पर गिरकर खराब हो जाता है। वहीं लगातार नमी वाला मौसम रहने के कारण बाजरे व मूंगफली की दाने पौधे पर ही उगना शुरू हो गए हैं। इसके अलावा बारिश व नमी के कारण कपास की फसल को भी सबसे ज्यादा नुकसान है। आदमपुर, हिसार, हांसी, बरवाला के एरिया में तेज हवा व बारिश के कारण कपास की फसलें जमीन पर बिछ गई हैं। इन एरिया में कपास का टिंडा गलन की समस्या भी बनी हुई है। बरवाला के खंड कृषि विकास अधिकारी डॉ रघुबीर कालीरामणा के अनुसार बारिश के कारण सभी फसलों को नुकसान हुआ है। कपास में जो टिंडा बन चुका है उसको बचाने के लिए किसान फंगस की दवा का स्प्रे कर सकते हैं। इसके अलावा पानी की निकासी का प्रबंध करके भी फसल को बचाने का प्रयास किया जा सकता है।

अब आगे कैसा रहेगा मौसम

बंगाल की खाड़ी में बने एक कम दबाब के क्षेत्र व साथ में राजस्थान के ऊपर एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन बनने व अरब सागर से भी नमी वाली हवा आने की संभावना से हरियाणा में मौसम 27 सितम्बर तक आमतौर पर परिवर्तनशील रहने की संभावना है। इन मौसमी सिस्टम से हरियाणा राज्य में 22-23 सितम्बर को तथा बाद में 26-27 सितम्बर को बीच-बीच में बादलवाई व हवा और गरज चमक के साथ कहीं -कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। इस दौरान कुछ एक स्थानों पर तेज बारिश भी संभावित है। मौसम विज्ञानियों को सितंबर के आखिरी सप्ताह में मानसून की वापसी का अनुमान है।

पानी में डूबी मूंगफली की फसल

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